Pages

Subscribe:

Ads 468x60px

test ad
Showing posts with label मो0 अरशद खान. Show all posts
Showing posts with label मो0 अरशद खान. Show all posts

...गई पाँच के चक्‍कर में फिर दस हज़ार की गड्डी!

-डॉ0 मोहम्‍मद अरशद खान
 
बीच सड़क पर दिया दिखाई
पड़ा पाँच का सिक्‍का।
 
भालूमल जी लगे उठाने,
वहीं रोक कर इक्‍का।
 
हुई हड़बड़ी संभल न पाए,
फिसले टूटी हड्डी।
 
गई पाँच के चक्‍कर में फिर,
दस हज़ार की गड्डी।

गिरधर भैया अपने हाथों पाती मुझको लिखना

–डा0 मोहम्मद अरशाद खान–
गिरधर भैया अपने हाथों पाती मुझको लिखना।

लिखना अबकी बार खेत में, कैसे आए धान।
देर रात तक दादा गाते, अब भी लम्बी धान?

गऊघाट के मेले से तुम, क्या–क्या लेकर आए?
काली गाय के बछड़े क्या बड़े–बड़े हो आए?

साँझ ढ़ले तक खेल–खेलते, अब भी सुखना–दुखना?
गिरधर भैया अपने हाथों पाती मुझको लिखना।

चौपालों में देर रात तक, होते हंसी–ठहाके?
क्या रामू काका मानस की, चौपाई हैं गाते?

बूढ़े दादा से तुम सबने, कितनी सुनी कहानी?
लिखना उनसे बात ज्ञान की, तुमने कितन जानी।

सीख लिया अब कल्लू ने क्या, अ–आ–इ–ई पढ़ना?
गिरधर भैया अपने हाथों पाती मुझको लिखना।

जल्दी करना देर न करना, पाती झट भिजवाना।
टूटी–फूटी भाषा में ही, सबका हाल बताना।

फिर मत पूछो पाती पाकर, मन कितना खुश होगा।
नहीं दिया पाती, सोचो, दुख मुझको कितना होगा?

हरकारे की राह ताकती, रहती तेरी बहना।
गिरधर भैया अपने हाथों पाती मुझको लिखना।

रेल के डिब्बे में


–मो0 अरशद खान

राजू है हैरान रेल के डिब्बे में।
पूरा हिन्दुस्तान रेल के डिब्बे में।

एक सीट पर पण्डित जी हैं, और बगल में मुल्ला।
दूजी पर सरदार महाशय, खाते हैं रसगुल्ला।

जैन, बौद्ध, क्रिस्तान, रेल के डिब्बे में।
पूरा हिन्दुस्तान रेल के डिब्बे में।।

कोई बोले हिन्दी, कोई उर्दू में बतलाता।
अंग्रेजी–कन्नड़–मलयालम, कोई तमिल सुनाता।

सबका है सम्मान, रेल के डिब्बे में।
पूरा हिन्दुस्‍तान, रेल के डिब्बे में।।

दो क्षण के इस हेल–मेल में, जुड़ जाते हैं नाते।
वही बिछड़ने पर आँखों में, दो आँसू दे जाते।

बना एकता–धाम, रेल के डिब्बे में।
पूरा हिन्दुस्तान, रेल के डिब्बे में।।