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पापा! गर मैं चिड़िया होता।

पापा! गर मैं चिड़िया होता

दीनदयाल शर्मा


पापा! गर मैं चिड़िया होता
बिन पेड़ी छत पर चढ़ जाता।

भारी बस्ते के बोझे से 
मेरा पीछा भी छुट जाता।

होमवर्क ना करना पड़ता
जिससे मैं कितना थक जाता।

धुआँ-धूल और बस के धक्के 
पापा! फिर मैं कभी न खाता।

कोई मुझको पकड़ न पाता
दूर कहीं पर मैं उड़ जाता

नानी

नानी

नानी तुम हो कैसी नानी?
नहीं सुनाती नई कहानी।

नानी बोली- प्यारे नाती।
नई कहानी मुझे न आती।

मेरे पास तो वही कहानी।
एक था राजा एक थी रानी।

नई बातें कहां से लाऊं?
तेरा मन कैसे बहलाऊं?

तुम जानो कम्प्यूटर बानी।
तुम हो ज्ञानी के भी ज्ञानी।

मैं तो हूं बस तेरी नानी।
तुम्ही सुनाओ कोई कहानी।

- दीनदयाल शर्मा