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गुडिया रानी हुई सयानी


गुडिया रानी हुई सयानी
सुरेश सपन

मेरी गुडिया रानी देखो, जब से हुई सयानी।
घर भर में करती फिरती है नई नई शैतानी।

मम्‍मी जब खाना लाती है, इधर उधर छिप जाती है।
ऑंख बचाकर दूध मलाई झटपट चट कर जाती है।
 पकड़े जाने पर हंसती है, शैतानों की नानी।
घर भर में करती फिरती है नई नई शैतानी।

पहन के चश्‍मा दादी जी का, सब पर रौब जमाती है।
दादा जी की छड़ी दिखाकर, बच्‍चों को धमकाती है।
नहीं मानती बात किसी की, करती है मनमानी।
घर भर में करती फिरती है नई नई शैतानी।

पढ़ने में भी तेज बहुत है, पहला नम्‍बर पाती है।
खेल कूद में सबसे आगे, रहकर मेडल लाती है।
उसकी बुद्धि पर होती है, हम सबको हैरानी।
घर भर में करती फिरती है नई नई शैतानी।