
आओ बाँध दूँ राखी
बिल्ली बोली चूहा भय्या,
दे दो मुझको माफ़ी
आज पर्व है रक्षाबंधन,
आओ बांध दूँ राखी
बोला चूहा हाथ जोड़कर,
ओ बहना अलबेली।
तुम हो राजा भोज, और
मैं ठहरा गंगू तेली।
राजा के मैं बनूँ बराबर
मेरी नहीं है इच्छा।
घर जाने को सूर्पनखाजी
मांग रहा हूँ भिक्षा।
सुनकर के यह भड़क उठी
बिल्ली ने पंजा मारा।
होशियार था चूहा लेकिन
हो गया नौ-दो-ग्यारा।।
- जाकिर अली ‘रजनीश’


