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बारात गई उड़!

Comrade Safdar.
मच्‍छर पहलवान
-सफ़दर हाशमी

बात की बात
खुराफ़ात की खुराफ़ात
 
बेरिया का पत्‍ता
सवा सत्रह हाथ
 उसपे ठहरी बारात
 
मच्‍छर ने मारी एड़
तो टूट गया पेड़
 
 पत्‍ता गया मुड़
 बारात गई उड़।

किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।


-सफदर हाशमी-


किताबें कुछ कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।

 
किताबें करती हैं बातें
बीते ज़मानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की
एक-एक पल की।
ख़ुशियों की, ग़मों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की।
क्या तुम नहीं सुनोगे
इन किताबों की बातें ?

किताबें कुछ कहना चाहती हैं।
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।
किताबों में चिड़िया चहचहाती हैं
किताबों में खेतियाँ लहलहाती हैं
किताबों में झरने गुनगुनाते हैं
परियों के किस्से सुनाते हैं
किताबों में राकेट का राज़ है
किताबों में साइंस की आवाज़ है
किताबों में कितना बड़ा संसार है
किताबों में ज्ञान की भरमार है।

क्या तुम इस संसार में
नहीं जाना चाहोगे?
किताबें कुछ कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।