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फूलों से होते हैं बच्चे, सच है ये। और सभी होते हैं अच्छे, सच है ये।


- डा0 अजय जनमेजय -

फूलों से होते हैं बच्चे, सच है ये।
और सभी होते हैं अच्छे, सच है ये।

इक पल रूठें तो दूजे पल हंसते हैं,
मानो मुस्कानों के लच्छे, सच है ये।

इनकी आँखों में खुद को पढ़ सकते हो,
दरपन जैसे बिलकुल सच्चे, सच है ये।

जो सोचें वो करके ही दम लेते हैं,
अपनी धुन के पूरे पक्के, सच है ये।

इतना खेलें भागे-दौड़ें सांस चढ़ी,
कब बैठे हैं फिर भी थक के, सच है ये।

मन के भोले दिल में भी तो भेद नहीं,
सब जैसे माना के मनके, सच है ये।