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रंगों का यह मंगलगान


रंग फुहारों से हर ओर, भींग रहा है घर आगंन
फागुन के ठंडे बयार से, थिरक रहा हर मानव मन !

लाल गुलाबी नीली पीली, खुशियाँ रंगों जैसे छायीं
ढोल मजीरे की तानों पर, बजे उमंगों की शहनाई !

गुझिया पापड़ पकवानों के, घर घर में लगते मेले
खाते गाते धूम मचाते, खुशियों के हैं फूल खिले !

रंग बिरंगी दुनिया में, हर कोई है एक समान
भेदभाव को दूर भागता, रंगों का यह मंगलगान !


- रवि प्रकाश केशरी

बाल कविता- चुन्नू चला स्कूल



नटखट गोलमटोल सा
लिए हाथ में रुल।
लिये पीठ पर बस्‍ता

चुन्नू पहुंचा स्कूल।।

एक हाथ में थर्मस थामे
दूजे में थी टाफी।
ब्रेड और जैम टिफिन में रखा
उतना ही था काफी।

नये दोस्‍त नये सहपाठी
धमाचौकडी, मस्ती

घर लौटे चुन्नू को देख
मम्मी उसकी हँसती।।

-रवि प्रकाश केशरी