
रंग फुहारों से हर ओर, भींग रहा है घर आगंन
फागुन के ठंडे बयार से, थिरक रहा हर मानव मन !
लाल गुलाबी नीली पीली, खुशियाँ रंगों जैसे छायीं
ढोल मजीरे की तानों पर, बजे उमंगों की शहनाई !
गुझिया पापड़ पकवानों के, घर घर में लगते मेले
खाते गाते धूम मचाते, खुशियों के हैं फूल खिले !
रंग बिरंगी दुनिया में, हर कोई है एक समान
भेदभाव को दूर भागता, रंगों का यह मंगलगान !
- रवि प्रकाश केशरी


