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मेरे ही जलने से होती, दुनिया में दीवाली।



- डॉ0 तारादत्त 'निर्विरोध' -

हवा भले ही तेज चले या आए आँधी काली।
मेरे ही जलने से होती, दुनिया में दीवाली।

जलना तो जीवन है मेरा, और उमर उमर है बाती।
जलता हूँ जब रात-रात भर, नई भोर तब आती।

मेरे जलते तन को देखों, फिर देखो मुस्काना।
औरों के हित मिट जाने में मैं सुख को जाना।

अंधियारे को दूर भगाने सूरज बन कर आता।
दीपक बोला, जब जलता हूँ उजियाला फैलाता।