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एक चिरैया, है गौरैया

 ता ता थैया
राजा चौरसिया

एक चिरैया, है गौरैया,
खूब फुदकती और चहकती,
उड़ती दिनभर मगर न थकती,
गाए, नाचे ता ता थैया।

कभी द्वार पर कभी तार पर,
मन को रहती नहीं हार कर,
जाती पनघट ताल तलैया।

बड़ी सयानी, श्रम की रानी,
कभी न मॉंगे, दाना पानी।
इसे निहारे, छोटा भैया।

जोड़े तिनका, अपने मन का,
लाड प्‍यार, पाती जन जन का।
उड़े फुर्र से बैठ मड़ैया।

6 टिप्पणियाँ:

Kailash Sharma said...

बेहद खूबसूरत बालकविता..बहुत संगीतमय ...

Manpreet Kaur said...

बहुत ही अच्छे शब्द है !हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
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डॉ. मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर बालकविता....

Patali-The-Village said...

बेहद खूबसूरत बालकविता|धन्यवाद|

डॉ0 दिनेश चंद्र अवस्‍थी said...

सुंदर कविता।

Amrita Tanmay said...

Abhi bhi mujhe baal kavita vahi aanand deti hai ...sundar