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बछड़ा बोला गाय से- काम चलेगा चाय से।





-सूर्य कुमार पाण्डेय-
बछड़ा बोला गाय से
दूध नहीं पीना मुझको,
काम चलेगा चाय से।

बिल्ली बोली शेर से
ठीक समय पहुंचो स्कूल,
क्यों आते हो देर से।

बंदर बोला भेड़ से
मामा अगर कहा मुझको,
कूद पड़ूंगा पेड़ से।

हाथी बोला ऊँट से
प्यास बुझाऊं मैं कैसे,
पानी के दो घूँट से।

पकड़े गए चुराते आँखें, आँख मिलाने से लाचार



–सूर्य कुमार पाण्डेय–

कुछ की काली, कुछ की भूरी, कुछ की होती नीली आँख।
जिसके मन में दुख होता है, उसकी होती गीली आँख।

सबने अपनी आँख फेर ली, सबने उससे मीचीं आँख।
गलत काम करने वालों की, रहती हरदम नीची आँख।

आँख गड़ाते चोर–उचक्के, चीजों को कर देते पार।
पकड़े गए चुराते आँखें, आँख मिलाने से लाचार।

आँख मिचौनी खेल रहे हम, सबसे बचा–बचाकर आँख।
भैया जी मुझको धमकाते, अक्सर दिखा–दिख कर आँख।

आँख तुम्हारी लाल हो गई, उठने में क्यों करते देर।
आँख खोलकर काम करो सब, पापा कहते आँख तरेर।

मम्मी आँख बिछाए रहतीं, जब तक हमें न लेतीं देख,
घर भर की आँखों के तारे, हम लाखों में लगते एक।

चूहा कूदा गंगा जी में

–सूर्य कुमार पाण्डेय–

बिल्ली मौसी चलीं बनारस, लकर झोला–डंडा।
गंगा–तट पर मिला उन्हें तब मोटा चूहा पंडा।

चूहा बोला– बिल्ली मौसी, चलो करा दूं पूजा।
मुझ–सा पंडा, यहाँ घाट पर, नहीं मिलेगा दूजा।

बिल्ली बोली– ओ पंडा जी, भूख लगी है भारी।
पूजा नहीं, पेट पूजा की करो तुरन्त तैयारी।

समझ गया चूहा, बिल्ली मौसी का पंगा जी में।
टीका–चंदन छोड़ घाट पर कूदा गंगा जी में।