Pages

Subscribe:

Ads 468x60px

test ad

...आओ खेलें होली।


आओ खेलें होली

-कृष्‍णेश्‍वर डींगर

 

आओ बनाएँ टोली,
हिल-मिल खेलें होली।

रंगों से भर झोली,
हाथों में ले रोली।

जमकर करें ठिठोली,
बचें न भोला-भोली।

घर-घर बने रंगोली,
कोठी हो या खोली।

कोई भाषा या बोली,
मिल-‍जुल खेलें होली।

9 टिप्पणियाँ:

India Darpan said...

बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना,
इंडिया दर्पण की ओर से होली की अग्रिम शुभकामनाएँ।

दिगम्बर नासवा said...

होली पे लाजवाब रचना ...

महेन्द्र मिश्र said...

बढ़िया प्रस्तुति
होली पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं...

Drobcek said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Reena Maurya said...

बहुत ही सुन्दर रचना.
***** happy holi*****

मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली said...

Happy Holi :)

veerubhai said...

भाव और अर्थ से संसिक्त ,बढ़िया रचना ,मेल बढ़ाती होली

veerubhai said...

घर-घर बने रंगोली,
कोठी हो या खोली।

कोई भाषा या बोली,
मिल-‍जुल खेलें होली।
जन मन को रंगता एकता बोध का गीत .

sonia verma said...

acha likhte ho aap :)

इस माह सर्वाधिक पढ़ी गयी कविताएँ