Pages

Subscribe:

Ads 468x60px

test ad
Showing posts with label त्रिलोक सिंह ठकुरेला. Show all posts
Showing posts with label त्रिलोक सिंह ठकुरेला. Show all posts

बादल जी, सबकी प्‍यास बुझाओ।

Cute cartoon Sun with umbrella Vector Illustration
-त्रिलोक सिंह ठकुरेला
सागर से गागर भर लाते, बादल काले-काले।
लाते साथ हवा के घोड़े दम-खम, फुर्ती वाले।

कभी खेत में, कभी बाग में, कभी गाँव में जाते।
कहीं निकलते सहमे-सहमे, कहीं दहाड़ लगाते।

कहीं छिड़कते नन्‍हीं बूँदें, कहीं छमा-छम पानी।
कहीं-कहीं सूखा रह जाता, जब करते नादानी।

जहाँ कहीं भी जाते बादल, मोर पपीहा गाते।
सब के जीवन में खुशियों के इन्‍द्रधनुष बिखराते।

बड़े प्‍यार से कहती धरती, आओ बादल आओ।
 तुम अपनी जल की गागर से सबकी प्‍यास बुझाओ।

प्‍यारी नानी

प्‍यारी नानी
त्रिलोक सिंह ठकुरेला

कितनी प्‍यारी बूढ़ी नानी, हमें कहानी कहती है।

जाते हम छुट्टी के दिन में, दूर गाँव वह रहती है।

उनके आँगन लगे हुए हैं तुलसी और अमरूद, अनार।

और पास में शिव का मंदिर पूजा करतीं घंटे चार।

हमको देती दूध, मिठाई, पूड़ी खीर बनाती हैं।

कभी शाम को नानी हमको खेत दिखाकर लाती हैं।

कभी कभी हमको समझातीं जब हम करते नादानी।

पैसे देकर चीज दिलातीं कितनी प्‍यारी हैं नानी।।