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दूध का कमाल Doodh Ka Kamaal

दूध का कमाल



पीकर गरम-गरम दुद्धू,
बुद्धू नहीं रहा बुद्धू।


खुले अकल के ताले सब,
नहीं अकल के लाले अब।


सुनकर अब अटपटे सवाल,
खड़े न होते सिर के बाल।


हर जबाब अब उसके पास,
सब उससे कहते शाबाश।

-नागेश पांडेय 'संजय'  

दादीजी का चश्मा खोया

दादीजी का चश्मा



दादीजी का चश्मा खोया,
सबकी आफत आई.

सब मिल खोज रहे हैं फिर भी
पड़ा नहीं दिखलाई.

दादी अपने सर पर देखो,
मीना जब चिल्लाई.

राम राम फिर गजब हो गया

छींक मारते घर को वापस आए।

 शिशुगीत ''घुमक्कड़ पुल्लू''
 
 एक बार की बात घुमक्कड़ पुल्लू, 
घुम्मी करते- करते पहुंचे कुल्लू।
पर कुल्लू  की ठण्ड देख घबडा़ए, 
छींक मारते घर को वापस आए।
 
डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'

पानी मत बरसाने लगना, शादी में तुम झमर-झमर


-नागेश पाण्डेय 'संजय'-
बादल भैया, बादल भैया, मैं छोटी सी बच्ची हूँ।
नहीं किसी से झग़ड़ा करती, सब कहते मैं अच्छी हूँ।

बादल भैया, बादल भैया, मैं पढ़ने भी जाती हूँ।
खूब लगन से पढ़ती हूँ मैं, अव्वल नम्बर पाती हूँ।

बादल भैया, बादल भैया, पास हमारे है गुडिया।
गुडिया बड़ी हो रही है, डर है न हो जाए बुढिया।

बादल भैया, बादल भैया, करनी है इसकी शादी।
धूम-धाम से शादी करने की है मुझको आजादी।

बादल भैया, बादल भैया, शादी में सब आएंगे।
दावत होगी, ढ़ोल बजेंगे, सब मिलकर नाचे गाएंगे।

बादल भैया, बादल भैया, पर लगता है मुझको डर।
पानी मत बरसाने लगना, शादी में तुम झमर-झमर।

बादल भैया, बादल भैया, तुम तो अच्छे भैया हो।
शादी ढ़ंग से हो जाए, बस तुम ही पार-लगैया हो।

चित्र साभार- http://photo.net/

कालू नेता


-नागेश पाण्डेय 'संजय'

कालू बन्दर बना भाग्य से, किसी गाँव का नेता।
हुआ उसे भ्रम, नाव गाँव की अब तो मैं ही खेता।

राज-काज की सुविधाएँ लीं, शुरू किए घोटाले।
बोला- पद ना छोड़ूं, किसकी जुर्रत मुझे हटा ले।

मनमानी की खूब, गाँव में गुण्डाराज चलाया।
रंग देखकर उसका भैया हर कोई चकराया।

हुआ प्रदर्शन, हुई रिपोर्ट पर दिया नहीं इस्तीफा।
बोला-तुम सब बस शरीफ, हो मैं हूँ बन्धु शरीफा।

पता शेर को चला, क्रोध में गुर्राता वह आया।
ऐसा मारा मुक्का, बन्दर नज़र नहीं फिर आया।