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बादल आया झूम के...

बादल आया
-शकुंतला सिरोठिया

बादल आया झूम के,
पर्वत चोटी चूम के।

इन्द्रधनुष का पहने हार,
ले आया वर्षा की धार।

मेंढ़क राजा मगन हुए,
झींगुर के सुख सपन हुए।

कजरी की धुन आती है,
नन्हीं चिड़िया गाती है।

11 टिप्पणियाँ:

Sunil Kumar said...

बहुत सुंदर बालगीत बधाई

"रुनझुन" said...

बहुत सुन्दर कविता! थैन्क्यू अंकल!! मुझे तो याद भी हो गई...

मनोज कुमार said...

वाह! सुंदर बाल गीत!!

sushma 'आहुति' said...

खुबसूरत अभिवयक्ति....

HPS SR. SEC. SCHOOL said...

Excellent
It is raining outside.
I am circulating this poem to the Nursery students.
Very helpful for the teacher.

Dsr.Amit Verma said...

बहुत सुंदर

veerubhai said...

बहुत ही सुन्दर गेय सांगीतिक रचना .बाल गीत सुन्दर और लघु रूपा .

veerubhai said...

मन बहलाता मनभावन बालगीत .सुन्दर ,मनोहर ,मज़ेदार .बहुत खूब ,बादल और दादुर का सम्मलेन . .कृपया यहाँ भी http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/पधारें -
http://veerubhai1947.blogspot.com/
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veerubhai said...

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Superb post and truly awesome lines you have shared here.

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