
-विष्णुकांत पाण्डेय-
घोड़ा नाचे, हाथी नाचे,
नाचे सोन चिरैया।
किलक किलक कर बंदर नाचे,
भालू ता-ता-थैया।
ठुमक-ठुमक खरहा नाचे,
ऊंट, मेमना, गैया।
आ पहुँचा जब शेर सामने,
मची 'हाय रे दैया।'
घोड़ा नाचे, हाथी नाचे,
नाचे सोन चिरैया।
किलक किलक कर बंदर नाचे,
भालू ता-ता-थैया।
ठुमक-ठुमक खरहा नाचे,
ऊंट, मेमना, गैया।
आ पहुँचा जब शेर सामने,
मची 'हाय रे दैया।'



