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रंगों का यह मंगलगान


रंग फुहारों से हर ओर, भींग रहा है घर आगंन
फागुन के ठंडे बयार से, थिरक रहा हर मानव मन !

लाल गुलाबी नीली पीली, खुशियाँ रंगों जैसे छायीं
ढोल मजीरे की तानों पर, बजे उमंगों की शहनाई !

गुझिया पापड़ पकवानों के, घर घर में लगते मेले
खाते गाते धूम मचाते, खुशियों के हैं फूल खिले !

रंग बिरंगी दुनिया में, हर कोई है एक समान
भेदभाव को दूर भागता, रंगों का यह मंगलगान !


- रवि प्रकाश केशरी

3 टिप्पणियाँ:

साहित्य said...

सुंदर कविता, होली की शुभकामनाऍं।

नीरज गोस्वामी said...

बहुत अच्छा लिखा है जाकिर भाई...वाह....
आप को होली की शुभ कामनाएं ...
नीरज

Anonymous said...

अच्छी लेखनी हे / पड़कर बहुत खुशी हुई /
आप जो हिन्दी मे टाइप करने केलिए कौनसी टूल यूज़ करते हे...? रीसेंट्ली मे यूज़र फ्रेंड्ली इंडियन लॅंग्वेज टाइपिंग टूल केलिए सर्च कर रहा ता, तो मूज़े मिला " क्विलपॅड " / आप भी " क्विलपॅड " यूज़ करते हे क्या...?
www.quillpad.in