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मेरे ही जलने से होती, दुनिया में दीवाली।



- डॉ0 तारादत्त 'निर्विरोध' -

हवा भले ही तेज चले या आए आँधी काली।
मेरे ही जलने से होती, दुनिया में दीवाली।

जलना तो जीवन है मेरा, और उमर उमर है बाती।
जलता हूँ जब रात-रात भर, नई भोर तब आती।

मेरे जलते तन को देखों, फिर देखो मुस्काना।
औरों के हित मिट जाने में मैं सुख को जाना।

अंधियारे को दूर भगाने सूरज बन कर आता।
दीपक बोला, जब जलता हूँ उजियाला फैलाता।

5 टिप्पणियाँ:

GATHAREE said...

baal man me badi baat

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर भावपूर्ण रचना ।

दिगम्बर नासवा said...

अंधियारे को दूर भगाने सूरज बन कर आता।
दीपक बोला, जब जलता हूँ उजियाला फैलाता।...

आशा का सन्देश देती sundar rachna है ..........

janta ki aawaz said...

baal man isi ko to kahte hai bina jakdan ke sab kuch sochta hai ....aabhar....

दीनदयाल शर्मा said...

apka prayas behad khoobsoorat hai. meri aur se hardik badhaee.Deendayal Sharma,Sahitya Sampadak, Taabar Toli, (Fortnightly News paper for Children) Hanumangarh Jn.335512, Rajasthan,Mobile: 09414514666
deen.taabar@gmail.com

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